भारत बन सकता है शॉपिंग हब

खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर इन दिनों देश में बहस का दौर जारी है। इससे ग्राहकों, स्थानीय खुदरा कारोबारियों और खुदरा कारोबार के वैश्विक दिग्गजों के हित जुड़े हों तो बहस होना स्वाभाविक ही है। पिछले कई साल से इस पर बातचीत जारी है लेकिन इस दौरान कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। फिलहाल औद्योगिक नीति एवं संवद्र्घन विभाग (डीआईपीपी) ने एफडीआई से जुड़े जिन व्यापक मुद्दों पर चर्चा पत्र पेश किया है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। इसके जरिये विभाग ने सभी अंशधारकों का पक्ष जानने की कोशिश की है।

पहले तो हमें यही जानना चाहिए कि किसी क्षेत्र में एफडीआई की जरूरत क्यों होती है? एफडीआई से जहां उपभोक्ताओं को तो फायदा होता ही ह, वहीं बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलता है। देश में दूरसंचार, वाहन और बीमा क्षेत्र में एफडीआई की वजह से आई कामयाबी को हम देख ही चुके हैं। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हुए निवेश की वजह से ग्राहकों को बेहतर सेवाएं और उत्पाद नसीब हुए हैं। बढ़ी प्रतिस्पद्र्घा ने भी कंपनियों को खुद को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया है।

भारतीय खुदरा कारोबार का एक अनोखा ढांचा है। राशनिंग के साथ शुरू हुआ इसका सफर कपड़ा और फुटवियर रिटेल से होकर गुजरा है। 1990 के दशक के आखिर में इसने तेजी पकड़ी। मौजूदा दौर में भी भारत दुकानदारों का देश है जहां करीब 1.5 करोड़ खुदरा कारोबारी हैं और यह तकरीबन 350 अरब डॉलर से भी बड़ा बाजार है। भारतीय खुदरा बाजार में असंगठित क्षेत्र का दबदबा है और कुल बिक्री का 94 फीसदी इनके जरिये ही होता है।

पिछले दशक में डिपार्टमेंटल स्टोर से लेकर हाइपर मार्केट और यहां तक कि स्पेशियलिटी स्टोर भारत में खुले हैं। कई वैश्विक दिग्गज पहले से ही भारतीय बाजार में मौजूद हैं। बड़े शहरों और मेट्रो में शॉपिंग मॉल खरीदारी के लिए मध्य  वर्ग की पहली पसंद के तौर पर उभर रहे हैं। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी खुदरा कारोबार का आकार भी बढ़ेगा। लोगों की क्रय शक्ति बढऩे पर बेहतर सेवाओं और उत्पादों के लिए उनकी मांग भी बढ़ेगी। इसके लिए विनिर्माण, रिटेल स्पेस, तकनीक, फूड लॉजिस्टिक्स और प्रसंस्करण में बड़े पैमाने पर निवेश की दरकार है।

अगर इसे सही तरीके से अंजाम दिया गया तो यह देश के लिए बहुत बड़े फायदे की सौगात साबित हो सकता है। ग्राहकों को किफायती कीमत पर बेहतरीन उत्पाद और सेवाएं मिल सकेंगी। बहरहाल एफडीआई को लेकर बहस सकारात्मक पहलुओं को न लेकर नकारात्मक बिंदुओं के इर्द-गिर्द हो रही है। कहा जा रहा है कि इससे छोटे कारोबारियों को नुकसान होगा और उनकी आजीविका संकट में पड़ जाएगी।  एफडीआई से सबसे बड़ा लाभ यह हो सकता है कि भारत दुनिया का शॉपिंग हब बन सकता है जिससे अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। इस सब बातों को मद्देनजर रखते हुए हम सही तौर तरीकों से ही देश में खुदरा कारोबार में एफडीआई के पक्ष में हैं।

- गोविंद श्रीखंडे, सीईओ, शॉपर्स स्टॉप
बिजनेस स्टैंडर्ड के 15 जुलाई 2012 के अंक से साभार