स्कूल लीडर्स ने भी माना स्कूलों के बजाए छात्रों को फंड देना ज्यादा उचित

नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस के बैनर तले अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थिंकटैंक संस्था सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्वारा आयोजित एक दिवसीय “निसा स्कूल लीडर्स सम्मिट” यूं तो बुधवार की देर रात संपन्न हो गया, लेकिन सम्मिट में उपस्थित स्कूल संचालकों व शिक्षाविदो ने स्कूली शिक्षा की बेहतरी के लिए शुरू किए गए अभियान रूपी इस मशाल को हमेशा जलाए रखने का संकल्प लिया। स्कूली शिक्षा की बेहतरी, छात्रों व अभिभावकों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने, शिक्षण प्रशिक्षण के श्रेष्ठ तौर तरीकों और सरकारी नीतियों के कारण बंदी के कगार पर पहुंच चुके निजी बजट स्कूलों की सहायता के लिए आयोजित इस नेशनल सम्मिट में देशभर के 12 राज्यों के 175 बजट प्राइवेट स्कूलों के प्रतिनिधि व प्रबंधन समूह उपस्थित रहे। विदित हो कि निसा (नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस) अपने गठन के कुछ वर्षों के भीतर ही निजी बजट स्कूलों की देश की सबसे बड़ी संस्था के तौर पर उभरी है। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में उपस्थित शिक्षक, प्रशिक्षक, मोटिवेटर व विद्वानों ने सीसीएस द्वारा चलाए जा रहे महत्वकांक्षी अभियान “स्कूल वाऊचर” को सस्ती व गुणवत्ता युक्त शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए अत्यंत कारगर उपकरण माना। प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की कि वाऊचर योजना को देश के सभी राज्यों में लागू किया जाए।

इंडिया हैबिटेट सेंटर में 5 दिसंबर को आयोजित “निसा स्कूल लीडर्स सम्मिट” का औपचारिक शुभारंभ सीसीएस के प्रेसिडेंट पार्थ जे शाह ने उद्घाटन भाषण के साथ किया। पार्थ ने सीसीएस द्वारा चलाए जा रहे स्कूल वाऊचर्स फॉर गर्ल्स (एसवीजी) का हवाला देते हुए बताया कि यदि सरकार स्कूलों को सीधे फंड देने के बजाए छात्रों को वाऊचर प्रदान करे तो सर्वशिक्षा अभियान की प्रभावशीलता में कई गुना वृद्धि हो सकती है। उन्होंने बताया कि वाऊचर सिस्टम से न केवल छात्र अपने मनचाहे स्कूलों में दाखिला ले सकेंगे बल्कि स्कूलों को भी अपनी गुणवत्ता सुधारने को मजबूर होना पड़ेगा।

सीसीएस के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के चेयरमैन आशीष धवन ने देश में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में अभी बहुत सारे काम बाकी होने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। गरीब बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने के लिए सीसीएस के वाऊचर सिस्टम की भी उन्होंने भूरी भूरी तारीफ की।

सम्मिट का समापन निसा के राष्ट्रीय संयोजक आर.सी. जैन द्वारा स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के सुझावों के साथ हुआ। आर.सी. जैन ने बताया कि किस तरह शिक्षा का अधिकार अधिनियम में शामिल कुछ नियमों के कारण निजी स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने नीतियों के निर्धारण के दौरान इस बात को नजरअंदाज कर दिया है कि देश में शिक्षा के प्रचार प्रसार में निजी बजट स्कूलों की महती भूमिका है। उन्होंने कहा कि जहां कुछ प्राइवेट स्कूलों का उद्धरण लिया गया है वो भी बड़े व नामी स्कूलों को ध्यान में रखते हुए किया गया है परिणाम स्वरूर सर्वशिक्षा अभियान की सफलता पर आशंका के बादल उमड़ने लगे हैं।

इसके पूर्व एनजीओ ज्ञानशाला के पंकज जैन, इंडिपेंडेट स्कूल एसोसिएशन ऑफ साऊथ अफ्रीका (ईसासा) की जेन हॉफमेर, 3.2.1 स्कूल्स के गौरव सिंह, आकांक्षा की वंदना गोयल, सुजय की प्रिया कृष्णन, क्रिस्टल हाऊस के जया जॉर्ज आदि ने अपने विचार व्यक्त किए और देशभर से आए स्कूल संचालकों व अध्यापकों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा के प्रचार प्रसार के बाबत सुझाव व प्रशिक्षण दिए।

- अविनाश चंद्र