कैसे करें एसी से घर ठंडा अब बताएगी सरकार

भरी गर्मी और तपती दोपहरी से बचने के लिए आपने अपने कमरे में लगवाने के लिए नया एसी लिया है लेकिन आप अपना कमरा कितना ठंडा करेंगे इसका फैसला सरकार करेगी। ये सुन आपका चौकना स्वाभाविक है लेकिन सरकार कुछ ऐसा ही करने का मन बना रही है।

ऊर्जा मंत्रालय ने एनर्जी बचाने के मकसद से सलाह दी है कि एसी की डिफॉल्ट सेटिंग 24 डिग्री सेल्सियस रखी जाए। ऊर्जा मंत्रालय ने हाल में एयर कंडीशनर बनाने वाली प्रमुख कंपनियों और उनके संगठनों के साथ बैठक में कहा कि वो एसी का डिफॉल्ट तापमान 24 डिग्री तय करें। साथ ही एसी पर ये लेबल भी चस्पा किया जाए कि इस तापमान को सेट करने पर आम जन को आर्थिक और स्वास्थ्य के नजरिये से क्या क्या फायदे हो सकते हैं। हालांकि डिफॉल्ट तापमान यानी 24 डिग्री सेल्सियस को लेकर भी लोगो में संशय है। उनका कहना है कि इस तापमान को बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकेगा लेकिन असल में ऐसा है नहीं। मौजूदा समय में ज्यादातर एसी का डिफॉल्ट तापमान 16 से लेकर 18 डिग्री सेल्यिस तक है। ऊर्जा मंत्रालय का दावा है कि अगर इसे बढ़ाकर 24 डिग्री किया जाता है तो इससे 36 फीसदी बिजली बचाई जा सकेगी जोकि हर साल करीब 20 अरब यूनिट के आसपास होगी।

दरअसल ऊर्जा मंत्रालय के तहत आने वाला संस्थान ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफीशियन्सी यानी बीईई काफी समय से बिजली बचाने के उपायों पर रिसर्च कर रहा है। उसके अध्ययन के बाद सरकार हरकत में आई है। बीईई के मुताबिक मौजूदा बाजार रूझान को देखें तो एसी की बदौलत भारत में बिजली का कुल भार 2020 तक 200 गीगावॉट का होगा और आगे यह बढ़ भी सकता है क्योंकि अभी सिर्फ छह फीसदी घरों में ही एसी इस्तेमाल होता है। बीईई के मौजूदा अनुमानों के मुताबिक देश में कुल इन्स्टॉल्ड एसी क्षमता आठ करोड़ टीआर (टन ऑफ रेफ्रिजरेशन) की है जो 2030 तक बढ़कर 25 करोड़ टीआर हो जाएगी। अगर एसी की सेटिंग को बदल दिया जाता है तो इस भारी मांग को देखते हुए देश हर दिन बिजली की चार करोड़ यूनिट की बचत कर सकता है।

भारत में एसी की जरूरत अलग अलग हिस्सों में अलग अलग है। मध्य भारत में मई से लेकर अगस्त तक एसी खूब इस्तेमाल होता है। भारतीय मध्यवर्गीय समाज में एसी स्टेटस सिंबल के साथ जरूरत भी बन गया है। लिहाजा मॉल, मल्टीप्लेक्स, मेट्रो, रेल, हवाई जहाज, दफ्तर, होटल आदि ऐसी कोई जगह नहीं छूटी है, जहां उसे यह सुविधा न दी जाती हो।

सरकार की दलील है कि सामान्यत मनुष्य के शरीर का तापमान 36-37 डिग्री सेल्सियस होता है लेकिन ज्यादातर होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तापमान 18 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाता है जोकि स्वास्थ्य के नजरिये से सही नहीं है। ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि अभी ये सुझाव भर है लेकिन इसे 6 महीने के अंदर अनिवार्य किया जा सकता है। 

सरकार का कहना है कि दुनिया के दूसरे मुल्कों में भी ऐसा ही है। सरकार इसके लिए जापान, हॉन्गकॉन्ग और ब्रिटेन की मिसाल देती है। जापान में 2005 में उस समय के पीएम कौजूमी के कार्यकाल में कूल ब्रिज नाम से अभियान चला जिससे वहां एसी का तापमान 28 पर डिफॉल्ट सेट कर दिया। ये हॉन्गकॉन्ग में 25.5 और ब्रिटेन में 24 डिग्री सेल्सियस डिफॉल्ट पर सेट है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में तापमान 25.6 से कम नहीं रख सकते। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में ये 25.6 और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 24 डिग्री सेल्सियस तय है। बावजूद इसके हमारे देश की आबोहवा और जरूरत इन सब से अलहदा है।

हांलाकि ये सच है कि रूम टेंपरेचर से तापमान कम करने पर एसी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और इससे बिजली की खपत भी ज्यादा होती है। ऐसे में अगर डिफॉल्ट तापमान में बार बार बदलाव ना हो तो ऊर्जा की खपत कम होगी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक दुनिया भर में एयरकंडीश्नरों की मांग सन 2050 तक तीन गुना हो जाएगी। इसके लिए जाहिर है बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन की जरूरत होगी। 2050 में पूरी दुनिया में साढ़े पांच अरब से ज्यादा एसी की दरकार होगी जबकि मौजूदा बाजार डेढ़ अरब से कुछ ज्यादा का है। इसका अर्थ यह है कि अगले तीस साल तक हर सेकंड 10 नए एसी बिकेंगे।

किसी भी घर में बिजली के बिल का एक बड़ा हिस्सा एसी चलाने से आता है। गर्मियों में बिजली की डिमांड इसलिए भी बढ़ जाती है। लेकिन क्या ये तार्किक उपाय है? सरकार एसी के तापमान की डिफॉल्ट सेटिंग तय करने की बजाय अगर देश की ऊर्जा जरूरतों पर ध्यान दे तो वो ज्यादा असरकारक होगा। ये कुछ वैसा ही है कि अगर हम अनाज ज्यादा पैदा नहीं कर पा रहे हैं तो सरकार फिक्स कर दे कि हर आदमी कितनी रोटियां खाएगा? गौरतलब है कि बिजली खपत और पर्यावरण के नजरिये से सरकार एसी को स्टार रेटिंग पहले से ही दे रही है। जो एसी कम बिजली खाते हैं उन्हें फाइव स्टार रेटिंग दी जाती है और उनकी कीमत दूसरे सामान्य एसी के मुकाबले ज्यादा होती है। बेहतर होता यदि सरकार एसी निर्माता कंपनियों को आवश्यक रूप से केवल 5 स्टार रेटेड एसी बनाने के लिए कहती। इससे ऊर्जा संरक्षण से संबंधित सरकार की चिंता का समाधान निकल आता।

कनाडा और यूरोप के कई ठंडे देशों में तापमान 26 डिग्री जाने पर ही वहां लोग गर्मी महसूस करने लगते हैं और कहा जाता है कि गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। ऐसे में वहां लोग समुद्र और स्वीमिंग पुल का रूख करते हैं जबकि भारत में 40 डिग्री तापमान भी सामान्य है। हमारे देश में काफी गर्मी पड़ती है और गर्मियों के दिनों में तापमान 48 डिग्री के पार भी पहुंच जाता है।

सबके शरीर की तासीर अलग अलग होती है। किसी को गर्मी ज्यादा लगती है तो किसी को कम। ऐसा ही ठंड का मामला है। कड़कड़ाती सर्दी में भी अपने एक साथी को मैंने अक्सर टीशर्ट पहने देखा है। पूछने पर उसका जवाब होता है कि उसे सर्दी नहीं लगती है बल्कि वो ठंड को इन्जॉय करता है। तो क्या सरकार उसे स्वेटर या जैकेट पहनने के लिए बाध्य कर सकती है?

सरकार हर वो काम क्यों करना चाहती है जिस पर विवाद हो। उसके करने के लिए तमाम जनकल्याण के काम पड़े है लेकिन वो उन्हें छोड़कर, बेतुकी नीतियां बनाकर उनका पालन करने के लिए लोगों पर दवाब बनाती है। चलिये मान भी लेते हैं कि सरकार एसी की डिफॉल्ट सेटिंग कर तापमान 24 डिग्री तय कर देती है लेकिन कारों के मामलों में क्या होगा। कारों के एसी के तापमान को कैसे तय किया जाएगा? अगर तय कर भी दिया गया तो क्या वो प्रैक्टिकली सही होगा। मई की तपती धूप में पार्किग में खड़ी कार में अगर डिफॉल्ट 24 डिग्री सेल्सियस पर एसी चलाया भी गया तो तब तक गंतव्य स्थान आ जाएगा जबतक कार ठंडी होगी। यही हाल फ्लैट की उस सबसे ऊपरी मंजिल का भी होगा जहां आग बरसाते सूरज के बीच 18 डिग्री तापमान पर सेट एसी, घंटों बाद भी कमरे को ठंडा करने में असफल रहता है। हालांकि इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि एसी को 24 डिग्री या उससे अधिक तापमान पर चलाना स्वास्थ्य के लिए और ऊर्जा संरक्षण के हिसाब से फायदेमंद होगा लेकिन इसके लिए तापमान को 24 डिग्री पर ऱखने का आदेश पारित करने की बजाए जागरूकता अभियान चलाया जाना अधिक कारगर साबित होगा।

- नवीन पाल (लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

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