जन्मदिन मुबारकः मिल्टन फ्रीडमैन

नोबल पुरस्कार विजेता मिल्टन फ्रीडमैन (1912-2006) पिछली सदी के उन कुछ महान अर्थशास्त्रियों में से थे जिन्होंने सारी दुनिया के आर्थिक सोच और नजरिये को बहुत गहरे तक प्रभावित किया और उसे नए आयाम दिए। इस महान उदारवादी अर्थशास्त्री के जन्मदिन के मौके पर यहां प्रस्तुत है उनके लेखों और पुस्तकों से लिए गए कुछ उद्धरण जो उनकी अनूठी आर्थिक दृष्टि को प्रस्तुत करते हैंः 

  • जो समाज समानता को स्वतंत्रता से ज्यादा महत्व देता है उसे दोनों ही नहीं मिल पाते। जो समाज स्वतंत्रता को समानता महत्व देता है उसे काफी मात्रा में दोनों ही मिल जाते हैं।
  • हमारी एक बहुत बड़ी गलती यह होती है कि हम नीतियों और कार्यक्रमों का उनके इरादों के आधार पर मूल्यांकन करते हैं न कि उनके नतीजों से ।प
  • अस्थायी सरकारी कार्यक्रम से ज्यादा स्थायी कुछ भी नहीं होता।
  • मुक्त बाजार के खिलाफ ज्यादातर दलीलों में स्वतंत्रता के प्रति विश्वास का अभाव ही नजर आता है।
  • सरकारें कभी नहीं सीखती केवल लोग सीखते हैं।
  • मैं किसी भी परिस्थिति में, किसी भी बहाने से और किसी भी कारण से और जब भी संभव हो तब करों में कटौती का हिमायती हूं।
  • महामंदी अन्य कालखंडों के बेरोजगारी की समस्या की तरह सरकार के कुप्रबंधन से पैदा हुई थी न कि निजी अर्थव्यवस्ता में निहित अस्थिरता के कारण।
  • दुनिया में कोई चीज मुफ्त नहीं है। 
  • कई लोग चाहते है कि सरकार उपभोक्ताओं की रक्षा करे। लेकिन इससे ज्यादा जरूरी समस्या है कि उपभोक्ताओं की सरकार से रक्षा की जाए। ऐसा इसलिए है क्योंकि उस पर पाबंदी लगी हुई है। आप ड्रग वार को शुद्ध आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो सरकार की भूमिका ड्रग माफिया को बचाने की है। यह शब्दश: सत्य है। 
  • राजनीतिक कार्यों की ज्यादातर ऊर्जा सरकार के कुप्रबंधन के परिणामों को ठीक करने पर खर्च होती है।
  • जो अकेला दौड़ता है वह सबसे तेज दौड़ता है।
  • मुद्रास्फीति बिना कानून बनाए किया गया कराधान है।
  • क्या यह सचमुच सही है कि राजनीतिक स्वार्थ आर्थिक स्वार्थों से बेहतर होते हैं?
  • अक्सर सरकार के समाधान समस्याओं जितने ही बुरे होते हैं।
  • मुक्त व्यापार के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जबतक दोनों पक्षों को लाभ नहीं होता तबतक कोई विनिमय नहीं होता।
  • जिसके पास आपका भला करने की शक्ति है उसके पास बुरा करने की भी शक्ति है।
  • सरकार किसी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि सरकार स्वयं समस्या है।

- आजादी.मी