स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर
इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।
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हरे भरे गांवों से कहीं बेहतर हैं शहरों की मलिन बस्तियां
अप्रैल 2, 2013 - 16:40झुग्गियां हैं उम्मीद, तरक्की और इज्जत का ठिकाना
झुग्गियां हैं उम्मीद, तरक्की और इज्जत का ठिकाना
अप्रैल 1, 2013 - 17:40प्रायः समाज शास्त्रियों, समता व समानता के पुरोधाओं और समाजसेवी राजनेताओं को शहरों की मलिन बस्तियों व झुग्गी झोपड़ियों की बढ़ती तादात पर अपने घड़ियाली आंसू बहाते और वहां रहने वाले लोगों के उद्धार के लिए भविष्य के वादों की घुट्टी पिलाते हम सबने सुना और देखा होगा। शहर की मलिन बस्तियों से संबंधित जब कोई रिपोर्ट किसी एनजीओ, कमेटी अथवा जनगणना आयोग द्वारा प्रकाशित की जाती है, अलग-अल
कुछ अंधेरे पहलू
मार्च 25, 2013 - 17:36शिशु मृत्यु दर और अपेक्षित आयु के मामले में बिहार राष्ट्रीय औसत से पीछे ही रहा करता था, लेकिन अभी वह दोनों मामलों में इसके काफी करीब पहुंच गया है। 47 प्रति हजार के आंकड़े के साथ फिलहाल बिहार शिशु मृत्यु दर के मामले में भारतीय औसत (48 प्रति हजार) से थोड़ा बेहतर स्थिति में है, जबकि 65.6 वर्ष की अपेक्षित आयु के साथ वह करीब-करीब भारतीय औसत (66.1 वर्ष) की बराबरी पर है। कुल मृत्यु
ऊर्जा का जबर्दस्त स्त्रोत बनेगी जलती बर्फ
मार्च 19, 2013 - 17:35जापान की नई पहल के बाद समुद्र तल में पाए जाने वाले गैस हाइड्रेट्स में दुनिया की दिलचस्पी बढ़ गई है
बजट की रेवड़ियों से चुनाव नहीं जीते जाते
मार्च 7, 2013 - 13:44बीटल्स का एक गीत है, 'कैंट बाय मी लव' (अपने लिए मैं प्यार तो नहीं खरीद सकता)। इसी तर्ज पर इस साल के बजट की थीम है, 'अपनी पार्टी के लिए मैं चुनाव तो नहीं खरीद सकता'। वित्तमंत्री आम तौर पर चुनाव से ठीक पहले वाले बजटों में सब्सिडी और कर्ज माफी के रूप में खुले हाथों रेवड़ियां बांटते हैं। ऐसे उपाय वोट दिलाने में ज्यादा कारगर नहीं होते, फिर भी वित्तमंत्री अपनी तरफ से उम्मीद नहीं छो
राजनीति में हैं नई आर्थिक सक्रियता की जड़ें
फरवरी 20, 2013 - 17:04छह महीने पहले सरकार निराशा और पंगुता की शिकार नजर आ रही थी। लगता था कि यह किसी को भी (खासकर ममता बनर्जी को) नाराज करने की हिम्मत कभी नहीं जुटा पाएगी। लेकिन जब से चिदंबरम वित्तमंत्री बने हैं तब से सरकार किसी ऐसे सुधारवादी कार्यकर्ता जैसी लग रही है, जो किसी भी सूरत में अपने लक्ष्य से कम किसी भी चीज पर राजी नहीं होने वाला। संसद में हार का खतरा उठाकर भी मल्टीब्रांड रिटेल का मामला
