जंजीरों में बंधा बचपन
झारखंड की राजधानी रांची से 30 किमी दूर इटकी में एक बच्ची पिछले तीन साल से अमानवीय माहौल में जीने पर मजबूर है। साथ ही भारत जैसे कल्याणकारी राज में सबको चिकित्सा का अधिकार नहीं दे पाने वाली सरकार भी कठघरे है। जी हां, मानसिक रूप से बीमार छह साल की एक बच्ची को खुद उसके माता-पिता ने जंजीरों में बांध कर रखा हुआ है।
सामिया खातून नाम की इस लड़की की उम्र छह साल है। इसका कसूर सिर्फ इतना है की बचपन से वो मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है और गरीबी की मार झेल रहे उसके मां-बाप के पास इतने पैसे नहीं कि वो किसी अच्छे डॉक्टर से उसका इलाज करवा सकें। बावजूद इसके परिवार वालो ने कर्ज लेकर अपनी बच्ची का इलाज रांची के सीआइपी में करवाया। लेकिन अब इनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वो इसके लिए दवा का बंदोबस्त कर सकें। सामिया के पिता मोहम्मद हाशिम कहते हैं, “क्या करें खेतीबाड़ी से इतना पैसा नहीं कमा पाते हैं कि अपनी बच्ची का इलाज करवा सकें। जब तक चल रहा है, तक तक इसे जिंदा रखेंगे।”
मां अपनी बच्चे से प्यार करती है इसलिए वो अपनी बेटी को खोना नहीं चाहती क्योंकि इससे पहले सामिया तीन बार पास के ही तालाब में गिर चुकी है। ऐसे में अगर वो इसे बांध कर न रखे तो इसकी जान जाने का भी खतरा है। सामिया की मां हफीजन खातून कहती हैं, “ अपने दिल पर पत्थर रख कर अपनी बच्ची को जंजीरों में मैंने बांधा है।”
कहा जाता है कि दुनिया में दुखों का अंत नहीं , लेकिन जंजीरों में बंधी बच्ची और माता-पिता तो वक्त और मजबूरी की मार झेल रहे हैं। लेकिन हद तो ये है कि सबको बेहतर चिकित्सा देने की चुनावी घोषणा पत्र में बात करने वाली पार्टियां इस बच्ची के साथ हो रहे अमानवीय बर्ताव से भी बेखबर है। इस बारे में जब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बैजनाथ राम को जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा, ”लड़की के परिवार को बोलिए आकर मिलें जो होगा करेंगे.” यानी वही लचर प्रशासनिक रवैया।
- मनीष मेहता, पत्रकार, रांची
