यह कैसी खेल भावना...

ब्राजील में सॉकर, अमेरिका में बास्केटबॉल और भारत की ही तरह पाकिस्तान में क्रिकेट लोगों की के दिलों-जान में बसा है. कहा जाता है कि खेल को जज़्बे के साथ खेलना चाहिए। खेल कभी जुनून बन जाए तो बड़ी बात नहीं जुनून जब खेल बन जाए तो बात बिगड़ जाती है.

पाकिस्तानी क्रिकेट में हाल में जो प्रकरण हुआ बेशक उससे खेल की भावना आहत होगी। पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया निराशाजनक प्रदर्शन किया। कई खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनहीनता की बात उठी, शाहिद अफरीदी गेंद को मुंह से चबाते नजर आए। हार के कारण गुस्साए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने खिलाड़ियों को सबक सिखाने की ठानी और पाकिस्तान टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद वसीम बारी की अध्यक्षता में समिति बनाई गई । जिसने पूर्व कप्तान मोहम्मद यूसुफ और यूनिस खान जैसे आला खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है। शोएब मलिक और राना नवेद-उल-हसन को एक साल के लिए निलंबित कर दिया। दोनों खिलाड़ियों पर 20 लाख रु. की पेनल्टी भी लगाई गई है। बॉल टेंपरिंग मामले में दो मैचों का निलंबन झेल चुके आफरीदी पर 30 लाख रु. का जुर्माना ठोंका गया है। विकेटकीपर कामरान अकमल और उनके भाई उमर अकमल को छह महीने तक पीसीबी की निगरानी में रहना पड़ेगा।

यानि खिलाड़ियों के साथ तालिबानी व्यवहार। गलती किससे नहीं होती और खेल में ऐसी बातें हो ही जाती हैं, लेकिन खिलाड़ियों के भविष्य पर तलवार लटक देना और दो खिलाड़ियों को दूध से मक्खी की तरह निकाल देना वाकई काफी कष्टदायक लगता है। आजीवन प्रतिबंध वाकई एक तालिबानी आदेश ही लगता है। पीसीबी के इस फैसले से खेलों के बारे में उस उक्ति को धक्का पहुंचता है जिसमें कहा जाता है, खेल में जीत किसी एक की ही होती है। इसलिए हार से सबक लेते हुए नई पारी की तैयारी करनी चाहिए।

  • मोहम्मद यूसुफ और यूनिस खान के साथ जो हुआ उसे आप सही मानते हैं?
  • क्या यह अमानवीय व्यवहार नहीं है?
  • क्या किसी खेल संस्था के इस तरह के फैसलों से खिलाड़ियों के मनोबल पर असर नहीं पड़ेगा?
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