बेकाबू भ्रष्टाचार

भारत एक बार फिर सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में है। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार इस सूची में भारत का 84वां स्थान है। विश्व के सबसे भ्रष्ट और सबसे ईमानदार देशों से जुड़ी इस सालाना रिपोर्ट को 17 नवंबर के बर्लिन में जारी किया गया। पेश है भ्रष्टाचार के कारणों और परिणामों की विवेचना:

शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र होगा जिस पर सरकार ने नीतिगत ढांचा तैयार नहीं किया है। हर मसला कानून के दायरे में है। हर बात के लिए कानून तो है लेकिन क्रियान्वयन पर सवालिया निशान लगते रहते हैं। कानून के दुरुपयोग या यूं कहें सही समय और सही स्थान पर सही रूप में इसका इस्तेमाल न होने पर भ्रष्टाचार का जन्म होता है। दुर्भाग्य से भारत इस बार दुनिया के बेहद भ्रष्ट देशों में शुमार हुआ है।

अब भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने इस वर्ष की अपनी भ्रष्टाचार सूची जारी की है तो इसमें भारत को 84वां स्थान मिला है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूजीलैंड सबसे कम भ्रष्ट देश है।

वर्ष 2009 की वैश्विक भ्रष्टाचार रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में फैले घूसखोरी, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक नीतियों को निजी स्वार्थों के लिए प्रभावित करने की वजह से अरबों का नुक़सान हो रहा है और इससे टिकाऊ आर्थिक प्रगति का रास्ता भी बाधित हो रहा है। राजनीतिज्ञों की उद्योग से निकटता एक बड़ी समस्या है। ट्रांसपेरेंसी के क्रिश्चियन होमबोर्ग राजनीतिक भ्रष्टाचार पर एक कानून की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं.

इससे पहले सितंबर 2009 में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ग्लोबल करप्शन रिपोर्ट-2009: करप्शन ऐंड प्राइवेट सेक्टर पेश की गई थी और इस रिपोर्ट में कहा गया था कि विकासशील देशों में बहुत सी कंपनियों ने भ्रष्ट राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से एक वर्ष में लगभग 40 अरब डॉलर की घूसखोरी की है। इस कथन से भारत के मौजूदा हालातों की काफी हद तक जानकारी मिल जाती है। इस बात की पुष्टि करते हुए झारखंड में मधु कोड़ा की संपत्ति से जुड़े नित नए खुलासों या फिर संसद में पैसे लेकर प्रश्न पूछने के मामलों को देखा जा सकता है।

रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया था कि भारत और चीन की गिनती दुनिया के बड़े बाज़ारों में तो होती है लेकिन विदेशों में कारोबार के मामले में यहां की कंपनियों को काफी भ्रष्ट माना जाता है। भारत में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के इस सर्वे में भाग लेने वाले लोगों में से 30 फीसदी ने कहा था कि भारतीय कंपनियां अपना काम जल्द करवाने के लिए निचले स्तर के अधिकारियों को रिश्वत देने से कतई नहीं झिझकती हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनिया भर में फैले भ्रष्टाचार, घूसखोरी और सार्वजनिक नीतियों को निजी स्वार्थों के लिए मनमाफिक मोड़ने की वजह से अरबों का नुक़सान हो रहा है और इससे दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति का रास्ता भी बाधित हो रहा है। हालांकि इस रिपोर्ट में भारत की यह कहते हुए प्रशंसा भी की गई है कि प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से निबटने के लिए ठोस क़दम उठा रहा है, कंपनियों को वित्तीय अपराधों के लिए जुर्माना अदा करने का विकल्प दिया जा रहा है।

भ्रष्ट आचरण से ऐसा माहौल बनता है जिसमें साफ़-सुथरी प्रतिस्पर्धा के लिए जगह नहीं बचती है, आर्थिक प्रगति अवरुद्ध होती है और अंततः भारी नुक़सान होता है। पिछले सिर्फ़ दो वर्षों में ही बहुत की कंपनियों को भ्रष्ट चाल-चलन की वजह से अरबों का जुर्माना भी अदा करना पड़ा है। इतना ही नहीं, इस तरह की सजाएं मिलने से कर्मचारियों के मनोबल पर असर पड़ता है। ऐसी कंपनियों का उपभोक्तओं में भी विश्वास कम होता है और संभावित भागीदारों में भी उसकी साख को बट्टा लगता है।

रिपोर्ट के लिए किए गए शोध में बताया गया है कि भ्रष्ट नीतियों की वजह से लागत में भी लगभग दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो जाती है और इसका ख़ामियाजा आखिर में आम जनता को ही भुगतना पड़ता है क्योंकि बढ़ी हुई लागत उन्हीं से तो वसूली जाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में कुछ गिनी-चुनी कंपनियां हैं जिनकी ताक़त बहुत बढ़ चुकी है और वो इस ताक़त के ज़रिए विभिन्न देशों की सरकारों को अपने हित साधने के लिए प्रभावित करती हैं। जिसमें क़ानूनों को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करवाना भी शामिल है।

निवेश की सुरक्षा बढ़ाने, व्यावसायिक सफलता सुनिश्चित करने और ग़रीब व धनी देशों द्वारा वांछित स्थायित्व लाने के लिए यह जरूरी है कि एक ऐसा माहौल बनाया जाए जिसमें व्यावसायिक साख को बढ़ावा मिले। आर्थिक संकट से उबरने के लिए यह ख़ासतौर से बहुत आवश्यक है। नवीनतम तकनीक जैसे कम्प्यूटर के प्रयोग से भ्रष्टाचार पर अकुंश लगाया जा सकता है।

बताने की जरूरत नहीं कि इस भ्रष्टाचार के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या आपको लगता है कि देश भ्रष्टाचार के गर्त से कभी बाहर निकल पाएगा?

शीर्ष पांच ईमानदार देश   सबसे भ्रष्ट पांच देश
1. न्यूजीलैंड 9.4 अंक   180. सोमालिया 1.1 अंक
2. डेनमार्क 9.3 अंक   179. अफगानिस्तान 1.3 अंक
3. सिंगापुर 9.2   178. म्यांमार 1.4 अंक
3. स्वीडन 9.2 अंक   176. सूडान 1.5 अंक
5. स्विटजरलैंड 9.0 अंक   176. इराक 1.5 अंक

HAMARE DESH ME KEVAL

HAMARE DESH ME KEVAL BHRASHTACHAR KI AZADI HAI.DESH KE SARE KARNDHAR KHULKAR MANTE HAI KI BHRASHTACHAR HAI,EX. PM LATE SHRI RAJEEV GANDHI KAH GAYE THE KI HUM JANTA KE KALYAN KE LIYE 1.00RUPYA BHEJTE HAI JO JANTA TAK PAHUCHTE PAHUCHTE 0.07 PAISE RAH JATA HAI 0.93 PAISE BHRASHT MANTRI,SANTRI,NETA,ADHIKARI AUR KARMCHARI KHA JATE HAI. MERE HEESAB SE SARKAR KE SALANA BUDGET KA 70000 GUNA KI TAX CHORI HOTI HAI AUR 7000GUNA JYADA KI RISHAWATKHORI HOTI HAI.SAB JANTE AUR MANTE HAI KI BHRASHTACHAR HAI KINTU MEETANAKOI NAHI CHAHTA KYUKI MEETANA CHAHEGE TO KHUD HI MEET JAYEGE KYUKI SARE HI BHRASHT HAI CHOR -CHOR MAUSERE BHAI. MAI PICHHLE 25 SALO SE BHARAT KE KARNDHARO KO LIKHTA AA RAHA HU KI BHRASHTACHAR MEETANE KA KAM MUJHE THEKE PAR DE DO MAI 61 SALO KE BHRASHTACHAR KO MATRA 7 SAAL ME JAD MOOL SE UKHAD FEKUNGA , YAH MARA BHARAT KE KARNDHARO KO KHULA CHALLENGE HAI. MAHESH CHNDRA VARMA CHIEF EDITOR SARKARI VYAPAR BHRASHTACHAR A WWEKLY NEWS PAPER FROM INDORE,MADHYA PRADESH 9826664861

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