स्टेट ऑफ गवर्नेंसः दिल्ली सिटीजन हैंड बुक 2009 का लोकार्पण

सेंटर फॉर सिविल सोसायटी ने 6 अक्तूबर 2009 को एसोचैम हाउस में स्टेट ऑफ गवर्नेंसः दिल्ली सिटीजन हैंड बुक 2009 का लोकार्पण किया। इस मौके पर हैंडबुक के दो प्रमुख अध्यायों स्लम फ्री दिल्ली और पब्लिक ग्रीवेंसेस सिस्टम पर पैनल डिस्कशन भी हुई। स्लम फ्री दिल्ली पर हुई चर्चा में दिल्ली नगर निगम के स्लम और जेजे विभाग के चीफ इंजीनियर उत्तम वासवानी, हाजार्ड सेंटर के डायरेक्टर डुनु रॉय, स्वेच्छा के डायरेक्टर विमलेंदु झा, हाउसिंग और लैंड राइट नेटवर्क की एसोसिएट कॉर्डिनेटर शिवानी चौधरी शामिल थे. पब्लिक ग्रीवेंसेस सिस्टम पर हुई चर्चा में दिल्ली सरकार के पब्लिक ग्रीवेंसेस कमिशन संतोष कुमार कैन, दिल्ली आरडब्ल्यूए ग्रीवेंसेस कमेटी के संयोजक रूद्र श्याम और सामाजिक सुविधा संगम की एक्जीक्यूटिव हेड रश्मि सिंह ने शिरकत की. इस मौके पर फ्रेडरिक नौमान स्टिफटंग फर डाय फ्रेहेट की भारत में प्रोजेक्ट मैनेजर कैथरीन बैनाक, टाइम्स फाउंडेशन के सीईओ पूरन सी. पांडे और सीसीएस के अध्यक्ष डॉ. पार्थ जे. शाह मौजूद थे।

फोटो गैलेरी

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कैथरीन बन्नाच, डा. पार्थ जे. शाह तथा पूरण सी. पाण्डेय "स्टेट ऑफ गवर्नेंस: दिल्ली सिटीजन हैंडबुक 2009" का विमोचन करते हुए

स्टेट ऑफ गवर्नेंस: दिल्ली सिटीजन हैंडबुक 2009 के विमोचन समारोह मे मौजुद प्रतिभागी

हैंडबुक 2009 के विमोचन समारोह के अवसर पर उपस्थित पैनलिस्ट सी सी एस रिसर्च इंटर्न 2009 दिल्ली सिटीजन हैंडबुक 2009 के साथ

 

एक गुंजायमान और गतिशील लोकतंत्र के लिए जानकार नागरिक प्राणवायु के समान है। 2003 में सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने सिटीजन हैंडबुक की संकल्पना को विकसित किया था ताकि राज्य सरकारों और नगर पालिकाओं की एजेंसियों, बोर्डों, निगमों, विभागों, योजनाओं और कार्यक्रमों का अध्ययन किया जा सके। इसका उद्देश्य नागरिकों की सरकार के कार्यो और उसकी कार्यप्रणाली से जुड़ी समझ को और पुख्ता करना है। जिससे तथ्य आधारित स्वतंत्र गुणवत्तापरक और मात्रात्मक शोधों को प्रोत्साहित किया जा सके, ताकि नागरिक बेहतर शासन की मांग करें तो उनके दावों का समर्थन किया जा सके।

इस तरह के अन्य प्रकाशनों के बीच ऐसी क्या चीज है जो हैंडबुक को विलक्षण और हटकर बनाती है?

इसका एक पहलू वह सिफारिशें हैं जो अच्छी लोक नीति पर आधारित होती हैं और दूसरा पहलू हैंडबुक के निर्माता हैं जो कि भारतीय जनसंख्या के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है- युवा।

सेंटर फॉर सिविल सोसायटी 2001 से सालाना रिसर्च इंटर्नशिप प्रोग्राम चला रही है। इंटर्नशिप का मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग को समाज के साथ जोड़ना है. ऐसा रिसर्च, एनालिसिस, राइटिंग और सभी तरह की आलोचनात्मक सोच में प्रशिक्षित करके आर्थिक मसलों की वास्तविक जीवन से जुड़ी समझ पैदा करके किया जाता है। इस प्रोग्राम की विश्वसनीयता इंटर्नशिप के लिए मिलने वाले आवेदनों की संख्या से ही जाहिर हो जाती है, जो कि दुनिया भर के कॉलेजों से आते हैं। लगभग 200 से ज्यादा युवा दो महीने के प्रोग्राम का लाभ ले चुके हैं और महत्वपूर्ण मसलों पर गहन शोध के जरिये अपने पेपर तैयार करके उन्होंने शासन को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया है।

दिल्ली गवर्नेंस इंटर्नशिप प्रोग्राम 2009

175 आवेदनों में से 21 उभरते शोधकर्ताओं का चयन किया गया। इस तरह के प्रकाशन के साथ काम करने और दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ मुलाकात को लेकर उत्साहित शोधकर्ताओं ने दिल्ली की तपा देने वाली गर्मी की भी परवाह नहीं की और सरकारी अधिकारियों, संबंधित विभागों के सेवानिवृत्त अधिकारियों और इन संगठनों से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरीकों से प्रभावित हुए लोगों से सूचनाएं जुटाई।

18 मई, 2009 को सीसीएस के इंटर्न्स के साथ एक विशेष मुलाकात में दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा, “युवाओं को इस तरह के कार्यक्रमों में भागेदारी करते देखना बहुत अच्छा लगता है। आप अगले कुछ सालों को लेकर क्या देखते हैं, इससे मुझे भी रू-ब-रू कराएं क्योंकि यह मेरी बहुत बड़ी मदद होगी। मुझे यह जानकर बहुत प्रोत्साहन मिलता है कि लोगों की बेहतर शासन में रुचि है और वह उसके बारे में सोचते भी हैं क्योंकि लोगों को यह कहते हुए देखना हमारी सख्त जरूरत है कि यह श्रेष्ठ से भी अच्छा है। हमें अपनी नहीं बल्कि आपकी आकांक्षाओं को पूरा करना है।”

दिल्ली सिटीजन हैंडबुक 2003 की सफलता के बाद सीसीएस ने इसी मेथोडोलॉजी (विधि) का प्रयोग करके मुंबई, झारखंड और स्वाभाविक है दिल्ली के लिए 2006 में हैंडबुक तैयारी कीं। मीडिया, अफसरशाही और राजनीतिक सर्कल में भी हैंडबुक पर व्यापक चर्चा हुई। यही नहीं कई जाने-माने विचारकों ने भी इसका अनुमोदन किया, जिनमें स्वामीनाथन अय्यर (दि टाइम्स ऑफ इंडिया), सुनील जैन और प्रोफेसर दीपक लाल (बिज़नेस स्टैंडर्ड), अशोक वी. देसाई (आउटलुक) और प्रताप भानु मेहता (सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च) शामिल हैं।

शहाना शेख (2008 इंटर्न) का मामला आपके साथ साझा करना हमारे लिए बड़े हर्ष की बात है,  वह पुनर्वास बस्तियों और झोंपड़पट्टी में रहने वाली महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालयों पर पेश किए पेपर के कारण राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रहीं। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर एमसीडी को इस पेपर के एक-एक शब्द पर गौर करना पड़ेगा। हमारे इस तरह के कई अध्ययन हैं, जिन्हें कॉलेज के छात्रों ने अंजाम दिया है, और जिनका अपना एक अलग महत्व भी है।

सीसीएस के बारे में
सेंटर फॉर सिविल सोसायटी एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी, शोध और शैक्षणिक संगठन है, जोकि पूरी तरह से सभ्य समाज को पुनर्जीवित करके भारत से सभी नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए समर्पित है।

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