कहां हैं हम...
पिछले एकाध माह में उत्तर प्रदेश में दलितों के साथ जो कुछ हुआ वह विचारणीय है. बीते अगस्त के आखिरी हफ्ते में मऊ जिले में एक दलित की 23 वर्षीय बेटी का ऑपरेशन थिएटर में बलात्कार कर दिया गया. इससे पहले फर्रुखाबाद जिले में एक दलित महिला का डॉक्टर ने चैकअप करने से इनकार कर दिया था. प्रशासन का मानना है कि उसने अपना काम कर दिया. इलाज से इनकार करने वाले दो डॉक्टर सस्पेंड कर दिए गए जबकि यह ब्लॉग लिखे जाने तक बलात्कार के प्रकरण का आरोपी फरार है. इसी तरह कानून अपनी गति से काम करेगा लेकिन ऐसे मामले दलित महिलाओं के शरीर और मन पर गहरे घाव छोड़ जाते हैं.
इलाज किसी भी प्रकार से एक बुनियादी जरूरत है और अधिकार भी. इस घटना को अगर बारीकी से देखा जाए तो पता चलता है कि दलित महिलाएं आज भी इन सब बुनियादी बातों के लिए संघर्ष कर रही हैं.
2001 की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कुल जनसंख्या का 21 फीसदी हिस्सा दलित समुदाय से है. ऐसे में राज्य दलितों की प्रतिशत के मामले में पंजाब और पश्चिम बंगाल के बाद देश में तीसरे स्थान पर है.
राज्य रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) के आकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो इस साल की पहली छहमाही में दलितों के खिलाफ 227 जघन्य अपराधों को अंजाम दिया जा चुका है. इस संदर्भ में अगर राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट ‘‘क्राइम इन 2007’’ पर नजर डालें तो पता चलता है कि देश में 9,819 दलित समुदाय के लोगों को किसी न किसी प्रकार की यातना को झेलना पड़ा, इसमें से 2,113 मामले अकेले उत्तर प्रदेश से थे. 2006 में दलित महिलाओं के साथ जहां बलात्कार के 240 मामले सामने आए थे वहीं 2007 में यह संख्या 318 थी. इस साल की बात करें तो एससीआरबी के मुताबिक 1 जनवरी से 15 जुलाई तक दलित बलात्कार और हत्या के 260 मामले दर्ज करा चुके थे. यानी कोई राहत नहीं. हालांकि केंद्र और राज्य सरकारें दलितों के हित में कई कदम उठाने के दावे करती रही हैं, लेकिन बीते दिनों हुई घटनाओं को रोकने के लिए अब भी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है. अधिकांश दलितों के जीवन स्तर और सामाजिक स्थिति में आजादी के साठ से ज्यादा साल के बाद भी कोई खास बदलाव नहीं आया है.
क्या आपको नहीं लगता सिर्फ आरक्षण लागू करके, दलितों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करके और दलितों के हितों को भुनाकर नेता अपना हित साध रहे हैं? क्या उत्तर प्रदेश के हालात दलितों की मौजूदा स्थिति को बयां नहीं करते? दलितों की स्थिति में वास्तविक सुधार के लिए आप क्या राय देंगे?
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