साप्ताहिक न्यूज़लेटर

02 फरवरी 2010

उपभोक्ता का रक्षक कौन?

उपभोक्ता की रक्षा कैसे की जा सकती है? वह कितना महफूज है? इसका स्पष्ट जवाब, जिसे मेरे हिसाब से नकारा नहीं जा सकता, यह है कि उपभोक्ता के लिए सबसे प्रभावी बचाव है मुक्त प्रतिस्पर्धा, घरेलू स्तर पर मुक्त प्रतिस्पर्धा और विश्व भर में मुक्त व्यापार। हर तरफ मुक्त प्रतिस्पर्धा के साथ यह मुक्त बाजार ही है- मुक्त निजी बाजार- जो उसका सबसे अच्छा रक्षक है।

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अनैतिक आचरण से बाजार को खतरा

महाभारत के अनुसार मनुष्य बुनियादी रूप से दोषयुक्त है और उसकी गलतियां संसार को विषम बनाती हैं। दुर्योधन उस विषमता का सबसे बड़ा प्रतीक है, लेकिन अन्य लोग भी उसमें अपना खासा योगदान करते हैं। युधिष्ठिर जुए का प्रतिकार नहीं कर सकते, कर्ण समाज में अपनी प्रतिष्ठा की चिंता से ग्रस्त है, अश्वत्थामा की प्रकृति में प्रतिशोध की भावना है, धृतराष्ट्र के मन में अपने बड़े बेटे के लिए अतिरिक्त स्नेह है।

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क्या विकास के लिए मदद जरूरी है?

यह किस्सा काफी विख्यात है कि अहमदाबाद के उपनगर के आकार के एक देश के प्रधानमंत्री को एक भारतीय अर्थशास्त्री ने यह सुझाव दिया था कि अपने देश को आर्थिक मंदी से उबारने के लिए वह वहां पर एक इस्पात संयंत्र की स्थापना कर ले। एक समाजवादी मित्र देश ने उसे इस सुझाव को अमल में लाने से वक्त रहते रोक दिया। यह सही घरेलू नीतियों के महत्व को उजागर करता है।

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कैसी है यह राजनीति...

मुंबई को लेकर मीडिया में हो रही बयानबाजी विकास के पथ पर बढ़ते भारत या मुंबई के भविष्य के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।

  • क्या इस तरह के बयानों से मुंबई के लोगों के हितों की रक्षा की जा सकती है?
  • भाषायी और क्षेत्रीयतावादी आधार पर की जाने वाली इस राजनीति के बारे में आप क्या सोचते हैं?

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अक्षरों के चोर...

बौद्धिक संपदा से जुड़े कानून हमारे यहां किताबों के भीतर ही दबे रहते हैं उन्हें लागू करने वाले या तो इस गैरकानूनी धंधे का हिस्सा हैं या फिर वे आंख मूंद कर बैठे हैं. अगर व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस सारे काम को बहुत ही सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जाता है, लेकिन हमारा पुलिस प्रशासन तो इस ओर से आंखे ही मुंदे हुए है।

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