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यौन अपराधों पर एक सामयिक रपट

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आग लगे तो शायद अंधेरा पिघले
तेरी चिता की कोख से अब सूरज निकले।

कम बजट स्कूलों पर आरटीई कानूनों की गाज-----(2)

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गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण

कम बजट स्कूलों पर आरटीई कानूनों की गाज-----(1)

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महात्मा गांधी द्वारा 1937 में सभी को शिक्षा की अपील के 75  वर्ष बाद; आजादी के 65 वर्ष बाद, संविधान बनने के 63 वर्ष बाद जिसमें शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के बजाय निदेशक सिद्दांत बनाया गया था। 1993 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा  शिक्षा के अधिकार के बारे में फैसला दिए जाने के पंद्रह साल बाद, 2002 में ससंद द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए  शिक्षा को मौलिक अधिका

न्याय में देर से बढती अंधेर --------- (3)

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कानून के कई जानकारों का मानना है कि मौजूदा हालात में न्याय में देरी की मुख्य वजहें ये हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।

न्याय में देर से बढती अंधेर --------- (2)

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न्यायतंत्र की धीमी रफ्तार से केवल मुवक्किल ही नहीं वकील तक परेशान हैं। एक वकील की पीड़ा इन शब्दों में प्रगट हुई - जब भी कोई मुवक्किल मुकदमा करने के लिए या कानूनी सलाह हासिल करने के लिए मेरे पास आता है तो वह यह प्रश्न जरूर करता है, कि उस को कब तक राहत मिल सकेगी?

न्याय में देर से बढती अंधेर --------- (1)

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  • श्रीरामजन्मभूमि विवाद में लंबे समय से तमाम दंगे और व्यापक हिंसा हुई, लेकिन भूमि का मालिकाना मुकदमा 60 साल आया । इसके बाद यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चलेगा ।
  • भोपाल गैसकांड में 20 हजार से अधिक की मौत, लेकिन मुकदमे का फैसला 26 वर्ष बाद आया। फैसले से पूरा देश असंतुष्ट है। 

उलटी पट्टी और रंगराजन कमेटी की रपट------(2)

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इन दोनो दस्तावेजों के बाद रंगराजन कमेटी की रपट तीसरा महत्वपूर्ण दस्तावेज कहा जा सकता है।

उलटी पट्टी और रंगराजन कमेटी की रपट ------ (1)

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हाल ही में जब महाराष्ट्र में गन्ना आंदोलन भड़का हुआ था  तब प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त रंगराजन समिति ने जो रपट दी है उस रपट में उन सभी मांगों को लगभग स्वीकार कर लिया गया है  जो 1980 में शेतकरी संगठना ने पहले गन्ना  मूल्य आंदोलन की घोषणा करते हुए की थी । इसलिए यह माना जा रहा है कि इसकारण भविश्य में संगठना के कार्यकर्त्ताओं को  पहले की तरह का आंदोलन करने की

पर्यावरण के पहरूए

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देवलोक में शायद कोई होगा भारत के भाग्य का विधाता कि जिस सप्ताह महाकुंभ शुरू हुआ उसी सप्ताह पर्यावरण मंत्रालय का एक भ्रष्ट अधिकारी पकड़ा गया। इसलिए कहती हूं ऐसा, क्योंकि अगर आपको उदाहरण चाहिए पर्यावरण मंत्रालय की लापरवाही और नालायकी का तो वह मिलता है गंगा और यमुना नदियों के मैले पानी में। भ्रष्ट न होते पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी तो इन पवित्र नदियों का पानी आज मैला बिल्कुल न

अमीरों पर अधिक कर या व्यवस्था में सुधार?

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देश में 'अत्यधिक अमीर' लोगों पर अलग से कर लगाने की बात ने भारी चर्चा को जन्म दिया है लेकिन कोई भी इसके पक्ष में आवाज नहीं उठा रहा है। मैं पूरी ईमानदारी से एक बात कहना चाहूंगा कि वित्त मंत्री के साथ बजट पूर्व चर्चा में मौजूद 10 अर्थशास्त्रियों में से भी मैंने किसी को इसका समर्थन करते नहीं देखा। मुझ समेत चार लोग तो स्पष्ट रूप से इसके विरुद्घ थे। ऐसे में हम अखबारों में इस तरह की