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फेसबुक के जन्मदाता मार्क जुकरबर्ग को वर्तमान पीढ़ी का महानतम व्यक्ति कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। महानता के मामले में निर्विवाद रूप से वह अपने समकक्षों से आगे, बहुत आगे निकल गए हैं। महज एक दशक पूर्व शुरू किए गए फेसबुक नामक अपने स्टार्टअप की बदौलत 31 वर्ष की अत्यंत कम आयु में खरबपति बनने का कारनामा करने और उससे भी बड़ी दरियादिली दिखाते हुए अपनी 99 फीसदी संपत्ति (लगभग 3 लाख करोड़ रूपए) दान देने की घोषणा कर उन्होंने दुनियाभर में प्रशंसा हासिल की है। अपनी दानवीरता के अलावा इन दिनों वह एक अन्य कारण से भी दुनियाभर की मीडिया, विशेषकर भारतीय मीडिया म

देश 67वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जी जान से जुटा हुआ है। यह वह मौका है जब हम दुनिया को अपनी ताकत, विभिन्नता में एकता और आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक प्रचुरता आदि से अवगत कराते हैं। हम यह प्रदर्शित करते हैं कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से देश व देशवासियों ने क्या क्या अर्जित किए हैं। निसंदेह आजादी के बाद से देश ने काफी प्रगति की है और दुनियाभर में अपनी मेधा और फौजी ताकत से काफी सम्मान बटोरा है। लेकिन कुछ प्रश्न अब भी उतने ही प्रासंगिक हैं जो छह दशक पहले थे। 10 अगस्त 2003 को अंग्रेजी दैनिक 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' में स्वामीनाथन एस.

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर
ध्यान हो तो धन भी सुंदर है। ध्यानी के पास धन होगा, तो जगत का हित ही होगा, कल्याण ही होगा। क्योंकि धन ऊर्जा है। धन शक्ति है। धन बहुत कुछ कर सकता है। मैं धन विरोधी नहीं हूं। मैं उन लोगों में नहीं, जो समझाते हैं कि धन से बचो। भागो धन से। वे कायरता की बातें करते हैं। मैं कहता हूं जियो धन में, लेकिन ध्यान का विस्मरण न हो। ध्यान भीतर रहे, धन बाहर। फिर कोई चिंता नहीं है। तब तुम कमल जैसे रहोगे, पानी में रहोगे और पानी तुम्हें छुएगा भी नहीं।
जन्म 10 दिसंबर, 1878 – निधन 25 दिसंबर, 1972 मैं चाहता हूं कि भारत का माहौल उस डर से मुक्त हो, जैसा आजकल हो गया है, जहां उत्पादन या व्यापार के कठिन काम में जुटा हुआ ईमानदार व्यक्ति अधिकारियों, मंत्रियों और पार्टी के आकाओं के हाथों में ठगे जाने के भय से आजाद होकर अपना कारोबार कर सके। मैं ऐसा भारत चाहता हूं, जहां योग्यता और ऊर्जा को कार्य करने का स्कोप हासिल हो। साथ ही इसमें उन्हें किसी के आगे नाक न रगड़नी पड़े और अधिकारियों एवं मंत्रियों से विशेष वैयिक्तक अनुमति प्राप्त करने की जरूरत न हो। जहां उनके प्रयासों का मूल्यांकन भारत और विदेशों में खुले बाजार के द्वारा किया जाए।
लोग कई बार मुझसे ये पूछते हैं कि वाकई जुगाड़ है क्या? ग्लोबल मैनेजमेंट विशेषज्ञ भारत के तेजी से हो रहे आर्थिक विकास का श्रेय जुगाड़ को देते हैं। लेगाटम इंस्टीच्यूट के एक ताजा सर्वे में भारतीय कारोबारियों में 81 फीसदी ने ये कहा कि उनकी कामयाबी में जुगाड़ ने मुख्य भूमिका निभाई।
Author: 
स्वामीनाथन अय्यर
व्यापार में कुछ खास नैतिक खतरे नही है। कोई भी काम जिसमें सही या गलत में चुनाव करना पड़े उसमें नैतिक खतरा होता ही है। व्यापारी भले ही अपने काम में ज्यादा नैतिक दुविधा का सामना करता है लेकिन यह किसी राजनेता या नौकरशाह की दुविधा से ज्यादा नही होता होगा।
 

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