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बाल श्रम क़ानून में सुधार– सही या गलत?

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कैबिनेट द्वारा अनुमोदित बाल मजदूरी पर प्रस्तावित अधिनियम को मीडिया बाल मजदूरी को बदावा देने वाला एक पिछडा कदम बता रही है। वास्तव में, यह अधिनियम बाल मजदूरी को लगभग पूरी तरह से प्रतिबंधित  करता है। 
 

पुस्तक 'पावर्टी एंड प्रोग्रेसः रियालिटीज एंड माइथ्स अबाउट ग्लोबल पावर्टी' का विमोचन

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विकास और गरीबी से संबंधित वास्तविकताओं और भ्रांतियों पर आधारित है अर्थशास्त्री दीपक लाल की यह पुस्तक

बड़े सुधार नहीं होने से शेयर मार्केट में निराशा

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यदि किसी असाधारण उत्प्रेरक की संभावना को छोड़ दें तो मई महीने में शेयर बाजार में अक्सर सुस्ती देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए पिछले साल बड़े बड़े रिफार्म का वादा कर सत्ता के करीब पहुंच रही मोदी सरकार से बाजार ने बड़ी उम्मीदें लगाई थीं। परिणाम स्वरुप शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। किंतु सरकार के कार्यकाल के एक साल पूरा होने को है ल

अनफ्रीडम : आजादी की दरकार

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भारत जैसे आजाद मुल्क में इन दिनों ‘बैन’ यानी ‘प्रतिबंध’ शब्द अखबारों और समाचार चैनलों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है. आम तौर पर प्रतिबंध का नाम सुनते ही किसी ‘कठमुल्ला’ और उसके उल-जुलूल फतवे का ध्यान आता है, मगर हमारे देश में इन दिनों सेंसर बोर्ड (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) और प्रतिबंध एक दूसरे का पर्याय बनते नजर आ रहे हैं.