क्या भारतीय बच्चे वास्तव में अन्य देशों के बच्चों से बेहतर हैं?

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अक्सर यह बात सुनने में आती है कि भारतीय छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी मेहनत व विषय विशेषज्ञता का लोहा मनवा रहे हैं। अक्सर अंतराष्ट्रीय स्तर के शोध व अध्ययनों में भारतीय व चीनी बच्चों के दुनियां के अन्य बच्चों से अधिक सक्षम बताया जाता है। गाहे-बगाहे दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश माने जाने वाले राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति भी अपने बच्चों को भारतीय व चीनी छात्रों से सबक लेने और समान रूप से प्रतिस्पर्धी बनने की अपील करते रहते हैं। ऐसे रिपोर्टों का हवाला देते हुए हमारी सरकारें भी अपना पीठ थपथपाती दिखती हैं। लेकिन व्यवहारिक स्तर पर क्या हमें अपने आसपास ऐसा देखने को मिलता है। आखिर यही अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं जब भारत में शिक्षा के स्तर व बच्चों की स्थिति के बाबत सर्वे करती हैं तो क्यों उन्हें इनकी आधी से ज्यादा आबादी अशिक्षा, बाल मजदूरी व भूखमरी का शिकार नजर आती हैं? अध्ययन में शिक्षा के लिए पर्याप्त स्कूलों, अध्यापकों व अन्य सुविधाओं की भी बेहद कमी बताई जाती है। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या आप बता सकते हैं...?

- अविनाश चंद्र