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पर्यावरण की शत्रु नहीं है तीव्र विकास दर

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चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने पिछले दिनों कहा कि उनके देश में अगले पांच साल के लिए वार्षिक संवृद्धि दर का लक्ष्य घटाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है। हमें तीव्र आर्थिक संवृद्धि के लिए अपने पर्यावरण का बलिदान नहीं करना चाहिए। उन्होंने सरकार से सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि से ध्यान हटाकर संवृद्धि की गुणवत्ता और लाभ पर केंद्रित करने को कहा। वेन का बयान चीन और भारत की आर्थिक संवृद्धि का वैश्विक पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पश्चिमी जगत की चिंताओं के मद्देनजर आया है। पिछले साल चीन की संवृद्धि दर 10.3 प्रतिशत थी, जो इस साल 9 प्रतिशत रह गई है। यद्यपि वह अपने देश के नागरिकों से मुखातिब थे, फिर भी उनका संदेश पश्चिम के आलोचकों पर लक्षित था।

सबित हुआ कि पेड़ नहीं है बांस

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हाल ही में केंद्र सरकार ने बांस को पेड़ नहीं, घास की संज्ञा दे दी है. इस आधिकारिक पुष्टि के साथ ही लम्बे समय से बांस को घास घोषित किये जाने के लिए चल रहे अभियान को राहत मिली है. इस आधिकारिक पुष्टि से जंगलो में रहने वाले आदिवासियों के अधिकार भी स्थापित हो सकेंगे.

कोपेनहेगन कवायद के मायने

बारह दिनों तक जलवायु परिवर्तन पर चले कोपनेहेगन सम्मेलन में अंतिम दिन अमेर

क्यों अहम है कोपेनहेगन सम्मेलन

हिमालय की बर्फ का पिघलना, समुद्र के जलस्तर का बढ़ना और पृथ्वी के तापमान में वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग की भ

मैं पैंसिल! मेरा परिवार वृक्ष!!

मैं लैड पेंसिल हूँ- साधारण लकडी की पैंसिल, जिसे सभी पढ़ने-लिखने वाले लड़के, लड़कियॉ और बड़े जानते हैं।

लिखना मेरी प्रवृत्ति और पेशा दोनों है। कुल मिला कर मै यहीं करती हूं।

लेखक: 
लियानोर्डो इ रीड
प्रकाशित: 
द फ्रीमैन - दिसंबर 1958

हाथियों को बचाने की कोशिश

    सरकार और निजी क्षेत्र के पारस्परिक सहयोग से छत्तीसगढ़ में हाथियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। वन और वन्य जीवन की रक्षा के लिए होने वाले सरकारी प्रयास अब तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहे हैं। शेर और बाघ को बचाने वाले वन्य जीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों में शेर और बाघों की संख्या में लगातार कमी देखने को मिली है। ऐसे में हाथियों को बचाने की छत्

लेखक: 
संजय कुमार साह
प्रकाशित: 
इकोनॉमी इंडिया (अक्टूबर 2006)