सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी की अति महत्वपूर्ण परियोजना का नाम स्कूल चयन अभियान है और इसे वर्ष 2007 में आरंभ किया गया था। यह ऐसा अभियान है जिसमें वर्तमान भारत के स्कूली शिक्षा पध्दति में बहुत ही जरूरी सुधार किए जाएंगे और इसके लिए शिक्षा प्रमाणकों, नियामक सुधारों और प्रोत्साहक शिक्षा जिज्ञासुओं की त्रि-भुजा पहुंच का प्रयोग किया जाएगा।
40 प्रतिशत भारतवासी अशिक्षित हैं, और सरकारी स्कूल भारत के बच्चों की जरूरतों पर खरे नहीं उतरते। नागरिक समाज केन्द्र गुण सुधार, विशेषकर गरीबों के लिए शिक्षा की पहुंच पर प्रकाश डालता है। नीति निर्धारकों, शिक्षा विशेषज्ञों और आम कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर स्कूली चयन अभियान हमारा ध्यान दाखिले के अवरोधों को हटाने और शिक्षा प्राप्त करने वालों को प्रोत्साहित में केन्द्रित करता है और स्कूलों और कॉलेजों को लाभप्रद बनाते हुए विधि और विस्तार की गुंजाइश और शिक्षा प्रमाणकों के माधयम से प्रतिस्पर्धाओं की ओर आगे बढ़ता है।
अधिक जानकारी के लिये देखें: स्कूल चयन अभियान
इस पेज पर विभिन्न लेखकों के शिक्षा पर लिखे गये लेख दिये गये हैं। पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें।आप लेख पर अपनी टिप्पणीयां भी भेज सकते हैं।
आरटीई के गुजरात मॉडल में छिपा है सभी समस्याओं का समाधान
फरवरी 14, 2013 - 17:36- गुजरात मॉडल में स्कूल भवन, खेल के मैदान आदि की अनिवार्यता की बजाय छात्रों के प्रदर्शन को बनाया गया है मान्यता प्रदान करने का आधार
- आरटीई के गुजरात मॉडल को अपना दिल्ली सरकार बचा सकती है 2 हजार स्कूलों और 4 लाख छात्रों का भविष्य
धंधा है पर गंदा... बिल्कुल नहीं (भाग एक)
जनवरी 18, 2013 - 19:33इलाहाबाद में इन दिनों महाकुंभ मेले की धूम मची है। महाकुंभ में स्नान कर अपने सभी दुखों से निवारण करने की चाह में देशभर के लोग अपने अपने काम-धंधे और रोजगार से छुट्टी लेकर यहां महीने भर डेरा जमाए रहते हैं। अल सुबह से ही संगम के तीरे डेरा डाले रहने के बावजूद त्रिवेणी के संगम स्थल पर मन भरकर डुबकी लगाने की इच्छा कुछेक लोगों को ही प्राप्त होता है। बाकी बस किसी प्रकार दूर किनारे से
आरटीई के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए साथ आए सीसीएस और एमसीडी
जनवरी 8, 2013 - 20:25दिल्ली के निजी व महंगे स्कूलों द्वारा अब पड़ोस के आर्थिक रूप से कमजोर व पिछड़ी जाति के छात्रों को निशुल्क दाखिला देने से इंकार करना संभव नहीं हो सकेगा। जी हां, पड़ोस के निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले की चाह रखने वाले गरीब व पिछड़ी जाति के छात्रों के अभिभावकों को अब पर्याप्त जानकारी के अभाव में भ्रमित करना और नियम और शर्तों का हवाला देते हुए स्कूल में भर्ती करने में आनाकानी बरत
स्कूल लीडर्स ने भी माना स्कूलों के बजाए छात्रों को फंड देना ज्यादा उचित
दिसम्बर 10, 2012 - 19:47नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस के बैनर तले अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थिंकटैंक संस्था सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्वारा आयोजित एक दिवसीय “निसा स्कूल लीडर्स सम्मिट” यूं तो बुधवार की देर रात संपन्न हो गया, लेकिन सम्मिट में उपस्थित स्कूल संचालकों व शिक्षाविदो ने स्कूली शिक्षा की बेहतरी के लिए शुरू किए गए अभियान रूपी इस मशाल को हमेशा जलाए रखने का संकल्प लिया। स्कूली शिक्
देश के सभी जिलों में शुरू हो स्कूल वाऊचर पायलट प्रोग्रामः जय पांडा
दिसम्बर 7, 2012 - 19:48उड़ीसा के केंद्रपाड़ा संसदीय क्षेत्र से बीजू जनता दल के सांसद व सुलझे हुए राजनेता बैजयंत (जय) पांडा ने थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्वारा स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों विशेषकर ‘स्कूल वाऊचर’ कार्यक्रम की जमकर तारीफ की है। श्री पांडा ने सीसीएस द्वारा विगत कई वर्षों से गरीब छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए चलाए जा रहे वाऊचर प्र
राजनैतिक हित साधने के उपकरण के रूप में तब्दील हो जाएगा आरटीईः निसा (अंतिम भाग)
अक्टुबर 29, 2012 - 16:56गतांक से आगे...
आरटीई कानून में स्कूलों के लिए वर्णित आधारभूत संरचना जैसे नियम के बाबत क्या कहेंगे आप?
राजनैतिक हित साधने के उपकरण के रूप में तब्दील हो जाएगा आरटीईः निसा (भाग एक)
अक्टुबर 23, 2012 - 20:18केंद्र सरकार द्वारा वंचित व कमजोर वर्ग को गुणवत्ता युक्त शिक्षा सुनिश्चित कराने के लिए लागू किया गया शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून स्वयं ही सर्वशिक्षा अभियान की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित होता प्रतीत हो रहा है। कानून में समाहित कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिनसे देशभर के लाखों निजी (बजट) प्राइवेट स्कूल बंद होने की कगार पर पहूंच गए हैं। अकेले दिल्ली में ही 13 हजार से ज्यादा स्कूलो
यूनियन से ऊपर छात्र
सितंबर 14, 2012 - 20:00आज के समय में नागरिक अधिकारों के लड़ाई की दृष्टि से शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण युद्ध का मैदान बन गया है। और इसप्रकार, गरीबी के खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण संघर्षों में से एक स्कूलों में लड़ा जाने लगा है।
डॉक्युमेंटरी फिल्में अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यमः सुभाष घई
सितंबर 3, 2012 - 17:26बॉलीवुड में ‘शो मैन’ के नाम से मशहूर निर्माता-निर्देशक सुभाष घई का मानना है कि डॉक्युमेंटरी फिल्में अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हैं। जो मुद्दे मीडिया तक नहीं पहुंच पाते डॉक्युमेंटरी फिल्में उन्हें लोगों तक पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि डॉक्युमेंटरी फिल्मों को यदि ठीक ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो यह कमर्शियल फिल्मों से ज्यादा पसंद की जाएंगी। शिक्षा के बाबत बोलते हुए सुभा
मैं बाहर जा रहीं हूं, प्रिंसिपल पूछे तो कहना किताब लेने गई हैं...
अगस्त 21, 2012 - 19:11सर, हमारी मदद कीजिए। हम पढ़ना चाहते हैं लेकिन हमारी टीचर हमसे सर मालिश कराती हैं। हाथ-पांव दबवाती हैं। क्लास छोड़कर घूमने चली जाती हैं और कहती हैं कि प्रिंसिपल पूछे तो कह देना कि स्टेशनरी (किताब आदि) लेने गई हैं। और तो और क्लास को शांत रखने और उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी मॉनिटर पर थोप जाती हैं।
