मई 2012

कानून वो क्या होता है?

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भारत के बारे में विदेशियों के बीच एक बात पर अवश्य राय कायम होते देखा जा सकता है। और यह राय यहां कानूनों की अधिकता और उसके न्यूनतम अनुपालन को लेकर है। यह नकारात्मक राय इन दिनों एक और कानून की अनदेखी के कारण और प्रबल हो रहा है। इस बार ऐसा आरटीई यानी शिक्षा का अधिकार कानून के अनुपालन में हो रही लापरवाही और हीला हवाली के कारण हो रहा है। दरअसल,निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान कर

कानून अंधा होता है या गधा होता है ?

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कानून अंधा होता है या कानून गधा होता है ?

प्राइवेट स्कूलों पर कसी जा रही लगाम, सरकारी स्कूल हो रहे बेलगाम

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निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चत कराने के लिए अदालती आदेश के बाद प्राइवेट स्कूलों की 25 फीसदी सीटों को गरीब बच्चों के लिए उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें इन दिनों एड़ी चोटी का जोर लगाए बैठी हैं। शिक्षा का अधिकार कानून 2009 का हवाला देते हुए सभी स्कूलों को ऐसा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह बात और है कि शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के नाम पर प्राइवेट स्कूलों

अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए

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अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए,
जिसमे इंसान को इंसान बनाया जाए !
जिसकी खुशबू से महक जाये पडोसी का भी घर,
फुल इस किस्म का हर सिम्त खिलाया जाए !
आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी,
कोई बताए कहा जाके नहाया जाए !
प्यार का खून हुआ क्यों ये समझने के लिए,
हर अँधेरे को उजाले में बुलाया जाए !
मेरे दुख-दर्द का तुझ पर हो असर ऐसा,

क्या भारतीय बच्चे वास्तव में अन्य देशों के बच्चों से बेहतर हैं?

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अक्सर यह बात सुनने में आती है कि भारतीय छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी मेहनत व विषय विशेषज्ञता का लोहा मनवा रहे हैं। अक्सर अंतराष्ट्रीय स्तर के शोध व अध्ययनों में भारतीय व चीनी बच्चों के दुनियां के अन्य बच्चों से अधिक सक्षम बताया जाता है। गाहे-बगाहे दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश माने जाने वाले राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति भी अपने बच्चों को भारतीय व चीनी छात्रों से सबक लेने और समा

मशहूर कार्टूनिस्ट शंकर के कुछ कार्टून

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आजकल मशहूर कार्टूनिस्ट शंकर का बनाया डा़ अंबेडकर का  कार्टून चर्चा में है लेकिन शंकर के कार्टून तो हमेशा नेताओं को अपना निशाना बनाते रहे हैं य़यहां पेश हैं उनके कुछ प्रमुख कार्टून

दो गायें और कई वाद

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सामंतवाद
आपके पास दो गायें हैं और उनका कुछ दूध जमींदार ले जाता है।
समाजवाद
आपके पास दो गायें हैं  तो एक आप अपने पड़ोसी को दे दें।
फासिज्म
आपके पास दो गाएं हैं । सरकार दोनों गायें ले लेगी । आपको इस नौकरी पर लगा देगी कि आप उनकी देखभाल करें और फिर वह आपको उसका दूध  बेचेगी।

चाय कमाल का पेय है मगर ---

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पिछले दिनों पहले योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने घोषणा की कि चाय को राष्ट्रीय पेय घोषित किया जाएगा।सुनकर बहुत अजीब सा लगा ।इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि चाय बहुत कमाल का पेय है। जिसके बारे में निसंकोच कहा जा सकता है – कम्बख्त छूटती नहीं मुंह से लगी हुई।लेकिन मन में सवाल उठा कि हम तो दशकों से चाय पी रहे है वह भी बिना नागा। जबतक अखबार की  गर्मागर्मा खबरो