फरवरी 2012
पुस्तकें – कुछ व्यंग्यविचार
फरवरी 26, 2012 - 15:13- किताबें देनेवाला मूर्ख होता है और लौटानेवाला महामूर्ख।
- एक पुस्तक से चुराना चोरी होता है कई पुस्तकों से चुराना शोधकार्य।
- किसी पुस्तक को पढ़ने के दो उद्देश्य होते हैं –उसका आनंद लेना और उसके बारे में शेखी बघारना।
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टीवी : व्यंग्यविचार
फरवरी 17, 2012 - 18:28- टीवी आंखों की चुइंगम है।
- टेलीविजन ने साबित कर दिया कि लोग कुछ भी देख सकते हैं मगर एक दूसरे की तरफ नहीं देख सकते।
- मैं रोजाना छह घंटे टीवी देखता हूं और कुछ अच्छा हो तो सात घंटे।
- लास एंजिलिस में लोग कूड़ा बाहर नहीं फेंकते वे उुससे टीवी प्रोग्राम बनाते हैं।
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व्यंग्य : वेलेंटाइन डे और डेमोक्रेसी डे का अजूबा मिश्रण
फरवरी 14, 2012 - 18:04वेलेंटाइन डे और डेमोक्रेसी में बड़ी समानता है। समानता क्या, दोनों को एक ही समझिए। दोनों में एकाध छोटी-मोटी भिन्नताएं हों तो हों, वरना हमें तो जुड़वा वाला मामला ही लगता है। एक को उठा दो और दूसरे को बैठा दो। वेलेंटाइन की बात करते-करते, डेमोक्रेसी में टहल जाओ या डेमोक्रेसी की फिक्र करते-करते, वैलेंटाइन की याद में खो जाओ।
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प्रेम – कुछ व्यंग्यविचार
फरवरी 14, 2012 - 18:00- एक अस्थायी पागलपन है जिसका इलाज शादी है।
- प्रेम का मुख्य उद्देश्य उपन्यासों को थीम उपलब्ध कराना है।
- यदि मैं तुम्हें अपना दिल दे दूं तो मेरे पास कुछ नहीं रहेगा और तुम्हारो पास दो हो जाएंगे।
- प्रेम चाकलेट का सब्स्टीट्यूट है।
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नेता - व्यंग्य विचार
फरवरी 12, 2012 - 21:11- यदि किसी नेता के दिमाग में कोई विचार आता है, तो वह गलत ही होगा।
- हमेशा ऐसे उम्मीदवार को वोट दीजिए जिसने सबसे कम वादे किए हैं. क्योंकि वह आपको सबसे कम निराश करेगा।
- हमारे नेताजी सफल इसलिए हैं क्योंकि वे दक्षिणपंथियों की तरह सोचते हैं और वामपंथियों की तरह बातें करते हैं।
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इसलिए भारत एक विकासशील देश है... !
फरवरी 6, 2012 - 16:03यह कहानी तब की है जब मुंबई में दलाल स्ट्रीट नाम की कोई जगह नहीं हुआ करती थी। उस समय यहां एक रिज क्षेत्र हुआ करता था, जिसमें तमाम कटीले पेड़ों व झुरमुटों के साथ ही साथ रसीले फलदार पेड़ व रंगीन फूलों के पौधे भी बहुतायत हुआ करते थे। रिज क्षेत्र में अन्य छोटे मोटे जानवरों व पशु पक्षियों के साथ चींटियों व टिड्डों की भी काफी संख्या पायी जाती थी। चींटी जहां सर्दी व बारिश के मौसम में
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