मार्च 2010
अभी भी समय शेष है...
एक बच्चा मांद से निकलकर, बड़ी ही बेबसी से अपनी मां का इंतजार करते हुए नजर आता है। उसे इंतजार है, शिकार पर
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कैसी पंचायत?...
अगर पुरानी मान्यताओं पर नजर डालें तो पाएंगे कि पंचों को परमेश्वर माना जाता है और ऐसे में पंचायतों का फैसला यानी भगवान का फैसला। अगर यह पंच रुपी भगवान ही खुद को मिले अधिकारों का
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कानून के तराजू पर निजी और सरकारी स्कूल...
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से स्थानीय अखबारों में यह खबर सुर्खियों में है कि समान व नि:शुल्क शिक्षा अधिनियम के 1 अप्रैल से लागू होने के बाद अब तक कागजों पर दिखाए जाने वाला प्रव
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यह कैसी खेल भावना...
ब्राजील में सॉकर, अमेरिका में बास्केटबॉल और भारत की ही तरह पाकिस्तान में क्रिकेट लोगों की के दिलों-जान में बसा है.
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मन के हारे हार...
बीते दो दशक की बात करें तो भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद लोगों ने उम्मीदों की नई रोशनी देखी. कई लोगों की जिंदगी बदल गई और कई लोग अपनी जिंदगी बदल रहे हैं.
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जगाओ गण-देवता को
मार्च 5, 2010 - 18:40आस्था पर आघात...
आधुनिकता की दौड़ में सब लोग थोड़े-से दिमागी सुकून की दरकार रखते हैं। इसी के चलते तो अक्सर श्रद्धा, संस्कार और आस्था सरीखे धार्मिक और आध्यात्मिक चैनलों पर बाबाओं को प्रवचन देते
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