वैकल्पिक वितरण तंत्र

क्यों बेहतर है वैकल्पिक वितरण प्रणाली?

·         बेहतर जवाबदेही और पारदर्शिता।  यूआईडी, डाक घर आदि का उपयोग कर पता लगाया जा सकता है।

·         बेहतर लक्ष्यीकरण  (लाभ का बड़ा प्रतिशत अधिक गरीब लोगों के समूह तक पहुंचाना)

·         वास्तविक रूप से कम बर्बादी ( राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 64% बर्बादी की तुलना में राजस्थान में नकद स्थानांतरण पेंशन योजना में 17% की बर्बादी)

·         कम बिचौलिए।

·         बेहतर उपभोक्ता सेवा/ शिकायत निवारण.

·         पीडीएस की तुलना में वैकल्पिक वितरण तंत्र में औसतन 48% कम बर्बादी।

 

शोध द्वारा प्राप्त पारंपरिक वितरण तंत्र जैसी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की विशेषता हैं:

·        वस्तुओं की अनियमित एवं अपर्याप्त उपलब्धता

·        वस्तुओं की खराब गुणवत्ता

·        भ्रष्टाचार का आलम

·         बुरा लक्ष्य निर्धारण (ऐच्छिक लोगों तक लाभ का न पहुंच पाना)

 

 

 

 

 

 

 

नकद स्थानांतरण

(Cash Transfers)

वाऊचर

(Vouchers)

 

 

 

 

 

 

 

 

सशर्त अथवा बिना शर्त

 पात्र लोगों के लिए      

 उपलब्ध वस्तुओं/सेवाओं  

 के लिए प्रमाण पत्र

 

 

Scheme

Total Expenditure

 

लक्षित परिवारों को राशन की दुकान की बजाए बाजार से खाना खरीदने के लिए नकद

 नकद प्रवाह का बोझ 

 विक्रेता न कि उपभोक्ता 

 पर

 

  नरेगा

 33,000 करोड़   रूपए

 

 खाद्य सुरक्षा  (+ पीडीएस)

 76,000 करोड़ रूपए

शराब अथवा तंबाकू खरीदने में उपयोग न हो सके

स्कूल वाउचर अथवा खाने के कूपन के तौर पर इस्तेमाल हो सके

 

कुल

100,000 करोड़ रूपए

 

 

   भारत में वैकल्पिक वितरण तंत्र के अनुभव

(Experiences with Alternative Delivery Mechanism in India)

 

अंतर्राष्ट्रीय अनुभव

 

राज्य

 योजना

परिणाम

 

Ø      प्रोगरेसा मैक्सिको ने स्कूल में बच्चों की नियमित उपस्थिति और स्वास्थ्य की देखभाल व बीमारियों की रोकथाम के अनुपालन की शर्त पर गरीबों को नकद उपलब्ध कराया।

Ø       आय, स्कूल में उपस्थिति और स्वास्थ संकेतकों में बढ़ोतरी देखने को मिला। 30% जनता लाभान्वित हुई।  

बिहार

बालिका साइकिल योजना के तहत लड़कियों को 2000 की नकद धनराशि देना उन्हें स्कूल में ज्यादा देर तक रोके रखने में कामयाब रहा।

स्कूल छोड़ने वालों की संख्या 2.5 लाख से घटकर 10 लाख हो गई

 

   उड़िसा

‘ममता’ योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को 5000 रुपए देने से संस्थागत प्रसव की संख्या में वृद्धि हुई। दो लाख से अधिक महिलाओं ने अपना पंजीकरण कराया

मातृ/ शिशु मृत्यु दर में कमी

 

राजस्थान/ कर्नाटक

वृद्धावस्था/ विधवा पेंशन के तहत सीधे 400 रुपए नकद धनराशि प्रदान करने की योजना

50% गरीबों तक पहुंचा लाभ

 

मध्य प्रदेश

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 3 करोड़ लोगों को सस्ते दर पर खाद्यान्न खरीदने के लिए रंगीन कोड युक्त वाउचर प्रदान किए जाते हैं

मौजूदा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में लीकेज की जांच की उम्मीद